Monday, 6 April 2020

चालबाज चीन : बुरे वक्त में इटली ने जीवनरक्षक पीपीई दान किए थे ; हालत सुधरे तो अब वहीं इटली को बेच रहा

चालबाज चीन ने कई देशों को डिफेक्टिव मास्क व किट बेचे



वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रभाव दुनियाभर में बढ़ता जा रहा है । इससे निपटने के लिए विकासशील देश अन्य देशों की मदद कर रहे है । लेकिन इस मुश्किल घड़ी में चीन की चालबाज़ी सामने आयी है । ब्रिटेन की मैगज़ीन "द स्पेक्टेटर" के मुताबिक चीन में जब कोरोनावायरस का प्रसार जब चरम पर था तब इटली ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया था । इटली ने चीन को निजी सुरक्षा उपकरण दान किए थे । वहीं अब जब इटली को पी पी ई की सख्त जरूरत है । तो चीन दान में लिए उन्ही उपकरणों को इटली को बेच रहा है । वुहान से फैले वायरस  ने यूरोप में सबसे ज्यादा तबाही इटली में मचाई है । इटली में 15000 से ज्यादा लोग इस वायरस के चलते अपनी जान गवां चुके है । वहा डाक्टरों और नर्सो पर सबसे ज्यादा संकट है ।  "द स्पेक्टेटर" के मुताबिक , इस संकट की घड़ी में मानवता का मुखौटा पहले चीन ने दुनिया को दर्शाया की वह इटली को पी पी ई दान में देगा । लेकिन बाद में चीन की चोका देने वाली बात सामने आई है । कई मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि चीन ने इटली को पी पी ई दान में नहीं दिया बल्कि बेच है । 

Sunday, 5 April 2020

कोरोना वायरस की दवा बनाने की उम्मीद बढ़ी , एंटी पेरासाइटिक ड्रग से कामयाबी मिली : ऑस्ट्रेलिया



कोरोनावायरस के पीड़ितो के इलाज के लिए दवा बनाने की उम्मीद बड़ गई है । ऑस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार पहले से मौजूद एंटी पेरासाइटिक ड्रग 48 घंटे में नॉवेल कोरोनावायरस को खत्म कर सकता है । मोनाश यूनिवर्सिटी की सह लेखिका कायली वाग स्टाफ ने कहा हमने पाया कि दवा की एक ही खुराक 48 घंटे में सभी वायरल आर एन ए को खत्म कर सकती है और इससे 24 घंटे में ही आधे से ज्यादा वायरस खत्म हो गए । हालाकि वाग़स्टाफ ने आगाह किया है कि ड्रग का परीक्षण लैब में विकसित वायरस कोशिकाओं पर किया गया है । इंसानों पर इसका परीक्षण किए जाने की जरूरत है । वायरल बीमारियों में आइवर्मेक्टिन को बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है और यह पूरी तरह सुरक्षित दवा है । उन्होंने कहा कि जब कॉरॉना महामारी की कोई मान्य दवा नहीं है । ऐसे में दुनिया में पहले से आइवर्मैक्टिन जैसी दवा है , तो इसे आजमाया जाना चाहिए , जो लोगो के लिए मददगार हो सकती है ।

#stayhome #coronavirus

Saturday, 4 April 2020

मंदसौर यूनिवर्सिटी के छात्रों को जिस ज़ूम क्लाउड ऐप से पड़ाया जा रहा था उसके फाउंडर ने प्राइवेसी और सिक्युरिटी को लेकर यूजर्स से मांगी माफी


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप ज़ूम के फाउंडर और सीईओ एरिक युआन ने प्राइवेसी और सिक्युरिटी खामियों को लेकर दुनियाभर के ज़ूम यूजर्स से माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि वे अगले 90 दिनों में इन खामियों को दूर कर यूजर्स का भरोसा कायम करेंगे । एफ बी आई और सायबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स ने ज़ूम ऐप में यूजर्स की प्राइवेसी और सिक्युरिटी की खामियों को उजागर किया है । पिछले हफ्ते एक ऐप में कहा गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप में हैकिंग का खतरा है । वहीं कैलिफोर्निया के एक व्यक्ति ने ज़ूम के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है। उसने आरोप लगाया है कि कंपनी फेसबुक को अवैध रूप से यूजर्स का डेटा बेच रही है। इसी संबंध में युआन ने ब्लॉग पोस्ट में कहा , हम मानते है कि प्राइवेसी और सिक्युरिटी को लेकर हम लोगो की और अपनी ही अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए है । इसके लिए मुझे गहरा दुख है ।
#Plz Uninstall this app (zoom cloud



Friday, 3 April 2020

Coronavirus: हवा में भी मौजूद हो सकता है कोरोना वायरस, नई स्टडी में फिर सामने आई यह बात

कोरोना वायरस संक्रमण फैलने को लेकर शुरुआत से यही कहा जा रहा है कि यह सामान्यत: हवा के माध्यम से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने के दौरान निकले ड्रॉपलेट्स से फैल सकता है। ये ड्रॉपलेट्स यानी द्रव कण हवा के साथ सामने वाले व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। अब एक नई स्टडी में फिर से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह वायरस हवा में भी घूमता हुआ मौजूद हो सकता है। जिस कमरे में कोरोना संक्रमित व्यक्ति ठहरा हो, उसके जाने के बाद भी हवा में कोरोना वायरस मौजूद हो सकते हैं। आइए जानते हैं और क्या कुछ सामने आया इस स्टडी में: 
डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस की हवा में मौजूदगी को लेकर अमेरिका की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह स्टडी की। इसमें इस बात की पुष्टि हुई है कि मरीज के कमरे से जाने के बाद भी कमरे की हवा में वायरस की मौजूदगी हो सकती है। मरीज के जाने के कई घंटे बाद भी कमरे के वातावरण में काफी मात्रा में वायरस हो सकता है। 
शोधकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल के जिस वार्ड में या कमरे में कोरोना के मरीज रह रहे हैं, उसके आसपास, कॉरिडोर वगैरह की हवा में भी वायरस हो सकते हैं। इस स्टडी में बताया गया है कि कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को वायरस से बचने के लिए प्रोटेक्टिव शूट, मास्क, दस्ताने वगैरह कितने जरूरी हैं।
नेब्रास्का यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस स्टडी में उन्होंने 11 मरीजों के कमरों को सैंपल के तौर पर लिया था और पाया कि इन कमरों के भीतर और बाहर की हवा में कोरोना वायरस मौजूद हैं। इस स्टडी को लीड करने वाले संक्रमित रोग विशेषज्ञ और जेम्स लॉलर का कहना था कि हमें जो रिजल्ट मिला है, वह हमारे संदेह की पुष्टि करते हैं। 
जेम्स लॉलर का कहना था कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के कमरे में निगेटिव एयरफ्लो होना जरूरी है। भले ही मरीजों की संख्या कितनी ही अधिक ही क्यों न हो, यह जरूरी है। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ फिलहाल कोई ऐसा आंकड़ा नहीं दे पाए हैं कि अबतक संक्रमित लोगों में से कितने मरीज हवा, ड्रॉपलेट्स, संक्रमित सतह या फिर संक्रमित के संपर्क में आने से इस वायरस की चपेट में आए। 
ऐसे समय में जब कोरोना का संक्रमण हर दिन बढ़ता जा रहा है, अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्यकर्मी पीपीई यानी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट की कमी से जूझ रहे हैं। दुनियाभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर भी कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। ऐसे में उनके लिए पीपीई बहुत ही जरूरी है

इससे पहले भी कुछ स्टडी में ये बात सामने आई थी कि कोरोना वायरस सिर्फ मरीज से ही नहीं फैलते, बल्कि ये कई जगहों की सतह पर भी मौजूद हो सकते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट में भी विशेषज्ञ ये बता चुके हैं कि मेटल या फिर प्लास्टिक की सतह पर कोरोना वायरस दो से तीन दिनों तक रह सकता है और ऐसे में इन सतहों को छूने पर भी लोग संक्रमित हो सकते हैं। 

एक ऐप जिसके द्वारा पढ़िए मोदीजी का हर एक ट्वीट , अपने स्वास्थ्य के बारे में व अपने आसपास के हर कोरोना संक्रमित व्यक्ति की जानकारी

I recommend Aarogya Setu app to fight against COVID19. Please download and share it using this link Android : https://play.google.com/store/apps/details?id=nic.goi.aarogyasetu
iOS : 

itms-apps://itunes.apple.com/app/id1505825357

 आरोग्य सेतु ऐप से आप अपने आसपास के कोरोना संक्रमित व्यक्ति के बारे में हर बात जान सकते है । साथ ही अपने स्वास्थ्य से संबंधी हर बात जान सकते है एवं मोदीजी व W.H.O. का हर एक ट्वीट हाथोंहाथ देख सकते है । 

With the Arogya Setu app, you can know everything about the corona infected person around you.  Also you can know everything related to your health and Modiji and W.H.O.  Every single tweet of can be seen by hand.


Plz download it and share this app to your family and friends !! 

#stayhome #stayhealthy 

Wednesday, 1 April 2020

कोरोना वायरस के चलते देखिए किस एक्टर/एक्ट्रेस ने कितना डोनेशन (पैसा) दिया


FEELING PROUD TO SHARE THIS ❣️ 
#bollywood

कोरोना वायरस के चलते , IPL रद्द होने पर 3 हजार करोड़ का नुकसान, नहीं मिलेगा क्रिकेटर्स को पैसा, मुश्किल में घरेलू खिलाड़ी

  • COVID-19 की वजह से 14 अप्रैल तक के लिए टला है IPL
  • मौजूदा सत्र पर मंडरा रहा रद्द होने का खतरा
  • टूर्नामेंट रद्द होने पर खिलाड़ियों को नहीं मिलेगा पैसा
  • खेल न होने पर फ्रैंचाइजी खिलाड़ियों का वेतन नहीं देंगे
  • ऐसे में घरेलू खिलाड़ी मुश्लिल में पड़ते दिख रहे हैं

विस्तार :

कोई खेल नहीं तो कोई वेतन नहीं। इस साल आईपीएल में करार करने वाले खिलाड़ियों के साथ भी ऐसा हो सकता है, क्योंकि अभी इसे स्थगित कर दिया गया है। तब तक इसके आगे आयोजित होने की संभावना नहीं है, जब तक BCCI साल के अंत में इसकी वैकल्पिक विंडो तैयार नहीं कर लेता। आईपीएल फ्रैंचाइजी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘आईपीएल भुगतान का तरीका ऐसा है कि टूर्नामेंट शुरू होने से एक हफ्ते पहले 15% राशि दे दी जाती है। टूर्नामेंट के दौरान 65% दी जाती है। बची हुई 20% टूर्नमेंट खत्म होने के बाद निर्धारित समय के अंदर दी जाती है। बीसीसीआई के विशेष दिशानिर्देश हैं। निश्चित रूप से किसी भी खिलाड़ी को अभी कुछ नहीं दिया गया है।’